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यह दैनिक दिनचर्या का काम आपको कैंसर रोगी बना सकता है।

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कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो आज के समय में तेजी से फैलती जा रही है। आज भारत ही नहीं विश्व के बहुत से देश इसकी चपेट में है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ भारत में ही रोजाना 1300 के लगभग मौत सिर्फ कैंसर की वजह से हो जाती है। कैंसर बहुत प्रकार का होता है जैसे - फेफड़े का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, मुँह का , गले का आदि। क्या आपको पता है कि हमारी दैनिक दिनचर्या के भी ऐसे बहुत से काम होते है जिनमे सावधानी नही बरतने से आपको कैंसर हो सकता है। यहाँ कुछ ऐसे दैनिक कार्य बताये गए हैं जिन्हें अगर आप रोज़ाना करते हैं तो आपको कैंसर हो सकता है। 
एम्स हॉस्पिटल के द्वारा ये कुछ काम हैं जिन्हें रोज़ाना करने से आपको कैंसर हो सकता है।
  1. पॉलीथिन में गर्म सब्जी कभी पैक ना करवाये। 
  2. चाय कभी भी प्लास्टिक के कप में ना पिए। 
  3. खाने की चीज़ों को माइक्रोवेव मे गर्म करते समय प्लास्टिक के बर्तन में नहीं रखना चाहिए। 
  4. कोई भी गर्म चीज़ प्लास्टिक में ना ले, खासकर खाने-पीने की चीज़े।
क्योंकि प्लास्टिक गर्मी के सम्पर्क में आता हैं तो एक रसायन उत्तपन्न करता हैं जो लगभग 32 प्रकार के कैंसर के कारण बनता हैं। ये काम खुद भी ना करें और अपने मित्रों और रिश्तेदारों को भी सूचित करें कि वे भी ये कार्य ना करे।
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कैसे बनते हैं नक्सली और कहाँ से मिलता है मदद जानिए

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नक्सलवाद को जड़ से ख़त्म करने के लिए जंगलों की ख़ाक छानने को भेजी गयी सुरक्षा बलों की टुकड़ियों से नक्सली  पर सीधा हमला करना दूरगामी समाधान नहीं होगा। इससे सुरक्षा बालों को नुक्सान ज्यादा होने की संभावना है। मेरे आंकलन के अनुसार ऐसा सीधा काम करने से सरकार को बचना चाहिए। 
ये कोई POK जैसी जगह नहीं है कि पूरा इलाका दुश्मन है, जो भी दिखे मार दो। उदाहरण के लिए बस्तर डिवीज़न के सुकमा, कांकेर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बस्तर या फिर गढ़चिरौली, गोंदिया या करीमनगर में 12 -14 वर्ष के बच्चे जो स्कूल यूनिफार्म पहन के जा रहे होते हैं, वो साधारण बच्चे भी हो सकते हैं या trained नक्सली।
बस्तर प्रभाग - के गाँवों में जाने पर दिखेगा की वहां सिर्फ बूढ़े आदमी, बूढी औरतें, कुछ अन्य महिलाएँ, और बच्चे ही हैं। लगभग सारे बड़े बच्चे और जवान लड़के - लड़कियां गायब रहते हैं।  दंडकारण्य में घुसकर अंदर एक पूरे जनमानस पर हमला करना कहाँ तक सही रहेगा, ये सरकार को तय करना है। या फिर हमारे राष्ट्रवाद  मित्रों को भी सोचना है, जो इस समय नक्सलवाद की कड़ियाँ हैं।

  1.  वो जो नक्सली नेता और कमांडर जो जंगलों में बैठे हैं। ये वो हैं जो जंगलों के अन्दर सञ्चालन करते हैं।
  2.  गांववाले जो अंदर पत्ते बीनने, लकड़ी बीनने, शराब बनाने और मवेशी पालने का काम करते हैं।
  3.  गाँव छोड़े वो लड़के लड़कियां जो लड़ाई करते हैं, कमाण्डरों द्वारा बनाए योजना के अनुसार हमलों को अंजाम देते हैं। 
  4.  खुफिया तंत्र - इनका एक ख़ुफ़िया तंत्र है जो की उधर वही गाँव वाले हैं। यही गाँव वाले सुरक्षा बालों के मूवमेंट की जानकारी से लेकर सामान को इधर से उधर पहुंचाते हैं। शहरों से संचालित ख़ुफ़िया तंत्र भी है जो अब सोशल मीडिया पे कविता या लेख के रूप में सन्देश भेजता है। और अक्सर जानकारिया वर्बल इकठ्ठा की जाती है जिससे सरकारी एजेंसियां पकड़ न सकें। इसके लिए बाकायदा टूर प्रोग्राम बनाया जाता है। सम्मेलनों के बहाने जाया जाता है और सन्देश का आदान प्रदान होता है।
  5.  पैसा, रसद, दवाइया, हथियारों और गोली बारूद का इंतज़ाम करने वाले।
  6.  जंगल में बैठे नेता और कमांडर को आज्ञा देने और पूरे माओवाद (नक्सलवाद) को संचालित करने वाले, ये लोग दिल्ली, रायपुर, कलकत्ता, हैदराबाद, मुंबई , नागपुर, पटना, लखनऊ या किसी भी अन्य शहर में बैठे लोग हैं। ये ही पैसों का ईन्तेज़ाम करते हैं। मतलब पूरे नेक्सस को चलाते हैं।
  7.  propaganda तन्त्र - मीडिया तन्त्र।
  8.  इनके साथ मिले हुए सरकारी तन्त्र में बैठे लोग, कोई वो चपरासी से लेकर न्यायलय में हो सकता है। 
अब सबसे पहले गांव वालों और लड़के लड़कियों के रोल को देखते हैं - ये बीच में पिसे लोग हैं और उन्होंने ये रास्ता चुना क्योंकि उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। नक्सली कमाण्डर पूरे इलाके पर ध्यान रखते हैं। जैसे ही इनके बच्चे 8-10 साल के होते हैं ये उनको उठा ले जाते हैं। उनको पढ़ाते हैं - क्या पढ़ाते हैं ? कि भारत की सरकार और ये बाहर से आये लोग तुम्हारे दुश्मन हैं। उनको ये गोली चलाने, ग्रेनेड चलाने और लैंड माइन लगाने तक की ट्रेनिंग देते हैं। उनके रहने खाने का इंतज़ाम करते हैं। इस बीच गांव वालों को धमकाया जाता है कि हमारा काम करो वरना तुम्हारे लड़के को मार देंगे और उन लड़को को कहा जाता है कि तुम्हारा परिवार खतरे में है। कई बार नक्सली कमांडर के आदेश पर गाँव में लूट और घर जलाने का काम किया जाता है, जिसको सुरक्षा बालों द्वारा किया गया बोल के प्रचारित किया जाता है। गाँव वालों को और उन लड़को को तनख्वाह भी मिलती है 3000 तक और हमला करने वाले दिन 8000 से 10000 तक। मरने पर सुरक्षा बलों के खिलाफ जहर भरा जाता है। गाँव वाले इस तरह नक्सली कमाण्डर के हाथ के मोहरे बने होते हैं। 
नक्सली कमांडर जंगलों में ही इलाज आदि की व्यवस्था करते हैं। शहरों से नक्सली समर्थक डॉक्टर आते हैं और दवाइयां आदि दिया जाता है। कई बार हस्पताल ले जाना जरूरी हो तो इलाज के अभाव में मार दिया जाता है, और उसका दोष भी सरकार और सुरक्षा बलों के सर पर डाला जाता है। 
पैसे का श्रोत ::: भारत में इस समय कुल 90 के आस पास वामपन्थी पार्टियां है जो कि चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हैं। ये सिर्फ चंदा उगाही के लिए बनाई गयी है। इनका काम होता है विदेशों से मिले पैसों को चंदा दिखाना। ये लोग NGO भी चलाते हैं जिसको मिले पैसे टैक्स रहित होते हैं। जंगलों से तेंदू पत्ता, पान का पत्ता, गांजा चरस आदि की तस्करी, हथियारों की तस्करी, उद्योगपतियों - ठेकेदारों से जबरन उगाही आदि से कमाए सब पैसे राजनैतिक चंदे के रूप में दिखाया जाता है। इस धंधे का टर्नओवर 5000 करोड़ के आस पास या उससे ज्यादा बनता है। 
शहरों में बैठे इनके संचालक विदेशों से पैसा, NGO को ग्रांट, तस्करी के ग्राहक, हथियारों का इंतज़ाम, मेडिकल सहायता, कपड़े आदि का इंतज़ाम करते हैं। ये इनका सञ्चालन करते हैं। ये शहरों में बैठे सफेदपोश हैं, ये संसद में बैठे हैं, ये विश्वविद्यालयों में शिक्षक के रूप में बैठे हैं, ये रिसर्च विद्यार्थी के रूप में बैठे हैं, ये डॉक्टर के रूप में बैठे हैं, ये इंजीनियर के रूप में बैठे हैं, ये बड़े बड़े अफसर बन के भी बैठे हैं, और ये न्यायालौं में भी बैठे हैं। इनका काम मनी मैनेजमेंट हैं, इनका काम राजतंत्र की गुप्त सूचनाएँ जंगलों में पहुँचाना है। इनका धन और सत्ता लोलुपता इतनी है कि ये भारत के खिलाफ लड़ रहे आतंकी संगठनों से भी सांठ गाँठ किये हुए हैं। नरकीय नक्सली नेता किशनजी का सीधा सम्बन्ध लश्करे तैबा से था और उसका कहना था कि हम अपने मकसद के लिए किसी भी संगठन से मिलने को तैयार हैं। 
शहरों में बैठे इन सफेदपश लोगों ने इनको वैचारिक छत्रछाया भी दिया है, इन लोगों ने मानवाधिकार के कार्यकर्ता के रूप में भी इनको ढाल दिया है। इन लोगों को आप बड़े बड़े सम्मेलनों में स्टेज पर बोलते भी देखा होगा।
चारु मजूमदार और कानू सान्याल के द्वारा पश्चिम बंगाल से शुरू हुए नक्सलवाद आंदोलन को हथियार बंद आंदोलन बनाया जंगल संथाल ने। कांग्रेस सरकार की नाकामियों, भ्रष्ट शासन, चोर जैसे पुलिस व्यवस्था, पुलिस और सरकारी अधिकारीयों की पैसा कमाने की लोलुपता ने बस्तर, गढ़चिरौली और करीमनगर के जंगलों में, झारखंड के कोयला खदानों में, दामोदर वैली में, उड़ीसा के खनिज सम्पदा को खूब लूटा। ये लूट 1950 से ही बेहिसाब शुरू हो चुकी थी। उद्योगपतियों और नेताओं के साथ सांठ गाँठ करके वहां के सरकारी कर्मचारि आदिवासियों और गांववालों से उनका घर तक छीन रहे थे। उनके जमीन से निकले अनमोल रत्नों जैसे कोयला, हीरा, सोना, पत्ते, लकड़ी आदि को खूब लूटा। उनको इतना भी नहीं दिया कि वो ढंग से जीवन जी सकें। इस पर इस इलाके के आदिवासी प्रजातियां जब आपत्ति जताई तो उनको झूठे मुकदमों में फंसा के जेलों में बंद किया गया, पीटा गया और हत्या भी की गयी। इस सब को सहने के बाद नक्सलबाड़ी से उठे आंदोलन को बड़ी आसानी से जंगलों और पहाड़ों में समर्थन मिल गया। 
नक्सलवाद - माओवाद को नक्सलबाड़ी से दंडकारण्य पहुंचाने का काम किया चारु मजूमदार, कनु सान्याल और जंगल संथाल ने। इसको बस्तर इलाके से, गढ़चिरौली, करीमनगर, वारंगल, झारखंड के कोयला इलाके, उड़ीसा के खनिज इलाको में पहुंचाने वाले प्रमुख नस्कली नेता थे किशनजी, कप्पू देवराज, गणपति, बासवराज, चंद्रमौलि, अरविंदजी आदि माओवादी नेता। 
नक्सलवाद को शहरों में पहुँचाने और इसमें डॉक्टर इंजीनियर आदि को शहरों में पहुँचाने का सबसे बड़ा काम किया माओवादी नेता कोबाड़ घांडी ने। कोबाड घांडी मुंबई में रहता था और उनसे अनुराधा शानबाग से शादी किया था, वो भी वामपंथी - माओवादी नेता थी। वो अक्सर दण्डकारण्य में जाती थी और महीनों रहती थी। शहर से रसद पहुँचाना, दवा आदि का इंतज़ाम, गर्भवती नक्सली महिलाओं की डिलीवरी कराना, देखभाल करना आदि उसका काम था। इधर कोबाड घांडी नक्सलवाद की विचारधारा को शहरों में पहुंचाता था वो इसके लिए मुंबई से दिल्ली, कलकत्ता, कानपूर, गुजरात, आन्ध्र, केरल, उड़ीसा के दौरे करता था और माओवादी विचारों को फैलाता था। उनसे कई डॉक्टर, इंजीनियर, वक़ील आदि सफेदपोश को माओवादी समर्थक बनाया था। उसने जंगलों के माओवाद को शहरों के सरकारी दफ्तरों में घुसाया, ये लोग विचारधारा नहीं बल्कि माओवादियों के मदद के बदले पैसे पाने के लिए जुड़े थे। ये लोग भ्रष्ट नौकरशाह, नेता और सुरक्षकर्मी थे। बाद में कोबाड घांडी और अनुराधा मुंबई से नागपुर आ गए और अपनी गतिविधियों चलाते थे। 2009 में कोबाड घांडी को दक्षिणी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया और वो जेल में है। जबकि अनुराधा 2008 में दण्डकारण्य के जंगलों में मलेरिया की बीमारी से मर गयी। कोबाड घांडी कैंब्रिज विवि में पढ़ने गया था लेकिन वहां वो माओवाद को बढ़ाने में लग गया जिससे उनकी गतिविधियों के कारण गिरफ्तार किया गया और ये भारत वापस आ गया। जंगलों से लेकर शहरों तक माओवादियों के खुफिया तंत्र और स्लीपर सेल बनाने का काम कोबाड घांडी और अनुराधा घांडी ने किया जिसका ये लोग इस्तेमाल करते हैं। घांडी दंपत्ति द्वारा बनाए फार्मूला का इस्तेमाल इनके लिए बहुत बड़ा कारगर कड़ी है।
नक्सलवाद - माओवाद आज कभी जुर्म और सम्पदा के लूट के खिलाफ खड़ी की गयी हथियारबंद लड़ाई अब बदल चुकी है। ये लड़ाई अब कोई जुर्म के खिलाफ लड़ाई नहीं है। अब ये लड़ाई दण्डकारण्य या अन्य पिछड़ों इलाकों में किसी भी तरह का विकास उन्नति को न पहुँचने देने की लड़ाई बन चुकी है। अब इस लड़ाई को शहरों में बैठे सफेदपोश नक्सलियों, विदेशियों द्वारा पोषित NGO को बचाने, तस्करी का धंधा बढ़ाने, उद्योगपतियों - ठेकेदारों से उगाही और चन्दा जुटाने की मुहीम बन चुकी है। जंगलों में रहने वाले गांव वाले इनके मोहरे हैं - ढाल है जो मर गए तो मर गए, बच गए तो बच गए। वो इस लड़ाई में न चाहते हुए भी शामिल हैं और चाह कर भी शामिल हैं – They just don’t have any choice इस नक्सलवाद - माओवाद को मिटाने के लिए जंगलों में बैठे नक्सली कमांडरों को मिटाना होगा उससे भी ज्यादे जरूरी है की इन शहरों में बैठे सफेदपोशों को मिटाया जाए। जंगलों में घुसकर कुछ नक्सली कमांडर और लड़ाकों को मार डालने से इन सफेदपोशों को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला कियोंकि ये फिर से अपना नेटवर्क खड़ा कर लेंगे और जंगलों में खुनी खेल खेलने लगेंगे।
जरूरी है कि शहरी नक्सलियों को पहले तोडा जाए, उनके सरकारी तंत्र में घुसे मददगारों को पहचान करके ख़त्म किया जाए। शिक्षण संस्थानों में पल रहे इनके स्लीपर सेल और मददगारों को एलिमिनेट करना होगा, मीडिया, मानवाधिकार और न्ययालयों में घुसे इनके मददगारों को ख़त्म करना होगा। अगर आप को यह रोचक जानकारी अच्छी लगी तो लाइक, फॉलो, शेयर, और comment, ज़रूर करैं।

भारत के राष्ट्रपति के बारे में कुछ रोचक जानकारी।

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Some interesting information about the President of India.

जैसा कि सब जानते है 17 जुलाई को देश के 14वें राष्ट्रपति  के लिए मतदान होगा, और 20 जुलाई को वोटों की गिनती होगी।  25 जुलाई को देश के मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल पूरा हो जाएगा और उस से पहले नए  राष्ट्रपति का चुनाव होगा।

राष्ट्रपति का चुनाव:
भारत मे राष्ट्रपति का चुनाव इलेक्‍ट्रॉल कालेज द्वारा किया जाता है, जो कि एक विशेष और सर्वोत्तम प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया की विशेषता यह है कि जनता के सीधे अपने राष्ट्रपति चुनने की बजाय जनता द्वारा चुने गए सांसद और विधायक मिलकर अपने वोटों द्वारा राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।

राष्ट्रपति का महत्व और अधिकार:
भारत के राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक कहलाते हैं और भारतीय राष्ट्रपति का भारतीय नागरिक होना जरूरी है।

भारत के राष्ट्रपति देश के कार्यपालक अध्यक्ष होते हैं, और संघ द्वारा किये गए सभी कार्यपालक कार्य उनके नाम से किये जाते हैं। राष्ट्रपति के पास एक मुख्य अधिकार यह भी है कि वे भारतीय सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च सेनानायक भी हैं। भारत के राष्ट्रपति को सभी प्रकार के आपातकाल लगाने व हटाने के अधिकार प्राप्त है, इसके अलावा युद्ध और शांति की घोषणा करने जैसे मुख्य अधिकार भी राष्ट्रपति के पास है।

मौजूदा भारत गणराज्य के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी हैं, जिनका कार्यकाल 25 जुलाई 2012 से शुरू हुआ था। राष्ट्रपति के लिए देश मे एक विशेष संबोधन (महामहिम) का प्रयोग किया जाता है। भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास स्थान नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन है, जो रायसीना हिल के नाम से प्रख्यात है।

भारत मे राष्ट्रपति की नियुक्ति इलेक्‍ट्रॉल कालेज (The Electoral College of India) द्वारा की जाती है। भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष होता है। भारत मे राष्ट्रपति अधिकतम कितनी भी बार पद पर रह सकते हैं, अब तक केवल पहले राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद ने ही इस पद पर दो बार अपना कार्यकाल पूरा किया है।

भारत के पहले राष्ट्रपति:

भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद थे। डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद की नियुक्ति 26 जनवरी 1950 को हुई थी। अब तक केवल पहले राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद ने ही इस पद पर दो बार अपना कार्यकाल पूरा किया है।

भारत की पहली महिला राष्ट्रपति:

भारत मैं महिलाओ को भी समानता के अधिकार प्राप्त हैं और देश की कोई भी महिला जो राष्ट्रपति पद के लिए योग्य है इस पद के लिए आवेदन कर सकती है। प्रतिभा सिंह पाटिल भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभीत करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2007 को पद व गोपनीयता की शपथ ली थी।

राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण:
भारत के राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण कराने का अधिकार भारत के मुख्य न्यायाधीश को प्राप्त है। भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी को 25 जुलाई, 2012 को संसद के केंद्रीय कक्ष में भारत के राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाये थे, भारत के मुख्य न्यायाधीश।

भारत के राष्ट्रपति के पास वैसे तो पर्याप्त शक्ति होती है, पर राष्ट्रपति के पद में ज्यादातर अधिकार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद् के द्वारा उपयोग किए जाते हैं।

भारत के राष्ट्रपति का वेतन:
भारत के राष्ट्रपति का वेतन 1,50,000 (US$2,190) (per month) है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद कैबिनेट सचिव की तनख्वाह राष्ट्रपति से ज्यादा हो गई थी जिसके बाद सरकार ने राष्ट्रपति के वेतन में बढ़ोतरी करने का फैसला किया था। कैबिनेट और संसद द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति के वेतन में 200 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी और यह 1.5 लाख रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 5 लाख रुपये तय किया गया है। इसके साथ ही भारत के राष्ट्रपति को सेवानिवृत्ति के बाद 1.5 लाख रुपये की पेंशन मिलेगी। राष्ट्रपति के जीवनसाथी को 30,000 रुपये महीने की सेक्रेटेरियल सहायता मिलेगी
भारत के राष्ट्रपति के बारे में यह रोचक जानकारी आपको अच्छी लगी तो इस विषय मे अपने विचार कमेंट बॉक्स में लिखे।

जल्दी अमीर बनना है तो जरुर पढ़िए यह पोस्ट।

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आइये जानते हैं हम सब अमीर कैसे बन सकते हैं।
अमीर कैसे बनें यह ख्याल हर किसी के मन में आता होगा, मेरे मन में भी आता है और क्यों न आये यदि आप सोचेंगे नहीं तो बनेंगे कैसे दोस्तो, मैंने अपनी पिछली लेख में Law Of Attraction के बारे में एक पोस्ट Share की थी, आपको याद होगा उसमें मैंने बताया था की यदि आप किसी चीज को दिल से चाहो और वो आपका Dream हो, या आपको उस चीज की ख्वाहिश हो तो आपको सब कुछ भूल कर उसे पाने में लग जाना चाहिए, तब वो चीज आपको मिल जाएगी वो चीज कुछ भी हो सकती है।

ऐसा जब हम कुछ ख्वाहिश कर रहे हो तो, मुझे लगता है सबसे पहले आप सभी के दिमाग में सिर्फ पैसे की तस्वीर उभरती होगी, वैसे तो इंसान को बहुत सारे चीजों की ख्वाहिश होती है लेकिन पैसे की ख्वाहिश कौन नहीं करता। पैसों से आपके सपनों का घर, आपके सपनों का कार और अपने परिवार की जिम्मेदारी पूरा हो सकता है, ऐसा सिर्फ हम ही नहीं सोचते यह उन लोगो ने भी सोचा होगा अपने Career के शुरुवात में, जो लोग आज करोडों और अरबों के मालिक हैं Successful Business रन कर रहे हैं और आज उस बुलंदी पर जा पहुचे हैं जहा जाने के बारे में हम सिर्फ सोच रहे हैं और अंदाजा लगा रहे हैं।

यह सब Possible है दोस्तो कियोंकि हम भी तो उन लोगों में से ही हैं जिनको हम अपना Idol मानते हैं जिनसे सीख लेकर हम उनकी राह पर चलकर अमीर बनने के सपने देखते हैं तो अगर वो लोग अमीर बन गए तो हम क्यों नहीं बन सकते तो चलिए जानते हैं की अमीर बन ने के लिए हमें क्या करना चाहिए।

वैसे तो दोस्तो अमीर बनने के बहुत सारे रास्ते हैं, लेकिन यह तो आप को तय करना है की आप किस रास्ते पर चलकर अमीर बनेंगे अगर आप गलत रास्ते को अपनाएंगे तो जीतनी जल्दी अमीर बनेंगे उस से कही जल्दी बर्बाद हो जायेंगे। लेकिन यदि आप सही तरीके से, मेहनत से और अपने बलबूते पर अमीर बनना चाहते हैं तो आज से खुद को बदलना पड़ेगा, पहले के लाइफस्टाइल को भूलना होगा उसे पूरी तरह Change करना होगा।

कियोंकि दोस्तो आज आप जिस जिंदगी को जी रहे हैं वह एकदम आराम की है और बिना मतलब की Lifestyle है जो आपको आपके मंजिल तक कभी पहुंचने नहीं देगी तो पहले आपको अपने Comfort Zone से बाहर निकलना होगा। मतलब बिना Planning की आराम वाली जिंदगी को छोड़कर Meaningful Life के बारे में सोचना होगा।
दोस्तो रातो रात तो कोई अमीर नहीं बन सकता इसका कोई Shortcut Formula भी नहीं है। तो क्या करना चाहिए? सबसे पहले तो आप अपने जीवन में लक्ष्य बनाइए जैसा की आपको आनेवाले कितने समय में अमीर बनना है, एक समय निश्चित किजिये  और फिर सोचिये की आप कैसे अमीर बन सकते हैं कैसे बहुत सारे पैसे बना सकते हैं, कमा सकते हैं फिर वह जरिया खोजिये जिस के मदद से आप आगे जा कर पैसे कमा सकें। वह जरिया आपको आपके अन्दर से ही मिल जायेगा। कियोंकि हर किसी के अन्दर कुछ न कुछ तो Talent होता है हर कोई अच्छा नसीब ले कर पैदा होता है या नहीं। यह तो मै नहीं जानता लेकिन यह जरुर जानता हूँ की आज जो आसमान की उस बुलंदी पर पहुच चूका है, अपनी मेहनत थोड़े से पैसे और Talent से बहुत बड़ा Business खड़ा किया और आज करोडों का मालिक है उन लोगों ने कभी भी नसीब जैसी चीज का जिक्र नहीं किया, कियोंकि उन्हें खुदपर यकीन था।

दोस्तो आप को अपने जीवन में कुछ करने के लिए सिर्फ और सिर्फ हौसला, हिम्मत और थोडा सा Knowledge चाहिये। इसके दम पर आप भी बहुत सारे पैसे बना सकते हैं। अमीर बन सकते हैं। यह तो आप भी अच्छी तरह जानते हैं की एक छोटे से छोटा Businessman भी अच्छा पैसा कमा लेता है यानि जो छोटा व्यापारी या दूकानदार होता है, और ये लोग तो ज्यादा पढ़े लिखे लोग भी नहीं होते फिर भी इतना पैसा कमा लेते हैं, की कोई अच्छी Company में नौकरी करने वाला भी पुरे साल में उतना नहीं कमा पाता।

तो दोस्तो अमीर बनने का पढाई लिखाई और बहुत बड़ी डिग्री से कोई संबंध नहीं है। आपने देखा होगा कितनी सारी Companies के मालिक तो एकदम पढ़े लिखे नहीं होते हैं, लेकिन उनके कंपनी में बड़ी डिग्री वाले लोग काम करते हैं।
यहाँ पर एक चीज तो साफ है की डिग्री लेकर तो आप अमीर नहीं बन सकते उस की मदद से सिर्फ किसीकंपनी में मासिक तनख्वाह पर काम कर सकते हैं। और यह कर के तो आप जिंदगी में कभी अमीर नहीं बन सकते।

अमीर बन ना है, तो आपको नौकरी के बारे में सोचना भी नहीं है। वरना आप भी उन सामान्य लोगों में शामिल हो जायेंगे जो अपना पूरा समय दे कर भी मिलनेवाली Salary से अपनी जरुरत नहीं पूरी कर सकते और अपनी पूरी जिंदगी थोड़े थोड़े पैसे कमाने में गवां देते हैं।
आपको कुछ ऐसा सोचना होगा जिस से आप अपना खुद का कुछ काम कर पायें और अपने हिसाब से अपना समय अलग अलग Activity में लगाकर पैसे बनायें। आज के अति आधुनिक युग में पैसे कमाने के बहुत सारे तरीके आपको मिल जायेंगे जो आप बिना किसी की गुलामी किये कर सकते हैं।
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आठ घंटे नींद लेने के फायदे और न लेने के नुकसान।

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आपने हमेंशा सबकी यह सलाह जरूर सुनी होगी कि हर दिन 8 घंटे जरूर सोना चाहिए इसका हमारे स्वास्थ्य पर बहुत असर होता है, ठीक से ना सो पाने की वजह से हमें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। चलिए जानते हैं, आठ घंटे नींद लेने के फायदे और न लेने के नुकसान, के बारे में।

1. सोते समय हमारा शरीर खुद को फिर से अगले दिन के लिए तैयार करता है। एक तरह से यह हमें अंदर से रिपेयर भी करता है।

2. जो लोग अक्सर पूरी नींद न लेकर काम करते रहते हैं उन्हें आगे चलकर भूलने की बीमारी जैसे अल्जाइमर भी हो सकते हैं।

3. कई लोगों के लिए 8 घंटे की नींद भी कम पड़ती है क्योंकि उनकी दिनचर्या बहुत एक्टिव होती है। वहीं कुछ लोग जो कम एक्टिव रहते हैं वह 6-7 घंटे की नींद भी ले सकते हैं।

4. अगर आपको यंग दिखना है तो पूरी नींद जरूर लें। अच्छी नींद नहीं लेने की वजह से ज्यादातर लोग जल्दी बूड्ढे दिखने लगते हैं। इससे चेहरे की चमक भी चली जाती है।

5. नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोग ज्यादातर depressed रहते हैं। दिन में सोने से भी इनकी नींद पूरी नहीं हो पाती है।

6. अच्छी नींद लेने से आपके रिश्ते में भी मधुरता बनी रहती है।

7. रात में ठीक से नींद नहीं लेने से बीमारियां जल्दी पकड़ती है क्योंकि आपका immune system वीक हो जाता है।

8. रात में दूध पीकर सोने से अच्छी नींद आती है और इससे थकावट भी दूर होती है।

अच्छी नींद लेने के लिए  क्या करें-

1. रात में ज्यादा एनर्जी वाली चीजें न खाएं क्योंकि फिर आपको नींद नहीं आएगी।

2. सोने से पहले चाय या कॉफी न पियें।

3. सोने से पहले ज्यादा लाउड म्यूजिक न सुने क्योंकि इससे नींद चली जाती है।

4. सोने से पहले फोन या इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करें क्योंकि फोन की रोशनी से नींद चली जाती है।

5. दिन में कम सोए ताकि रात को आसानी से नींद आ सके।

6. अच्छी नींद के लिए कोई किताब पढ़ सकते हैं या फिर मधुर संगीत भी सुन सकते हैं।
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सात दिन में गारंटी से पिम्पल्स ख़त्म कर ने का घरेलू नुस्खा।

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आज हम आपको बतायेंगे पिम्पल्स का एक बहुत ही कारगर नुस्खा अगर आप इस नुस्खे को करते हैं तो फिर ये सात दिन में ही आपके पिम्पल्स को खत्म कर देंगा।

तीन प्रकार के स्किन के लिए नुस्खा

1  इस नुस्खे में जो सबसे इम्पोटेंट चीज़ है वह है दही आपको दही का इस्तेमाल करना है दही के इस्तेमाल से चेहरे पर निखार आता है चेहरा मॉस्चोराइज़ रहता है एक कटोरी में दो चम्मच दही लेने के बाद एक चम्मच सरसों का तेल लेकर अच्छे से मिक्स कर लें ये नुस्खा है ओईली स्किन वालो के लिए।

2  ड्राई स्किन वाले कैसे इसका प्रयोग करेंगे ड्राई स्किन वाले तेल कि मात्रा बहुत कम लेंगे आधे चम्मच से भी कम अब इसमें आधे निम्बू का रस डाल कर अच्छे से इसे मिक्स कर लें ये नुस्खा है ड्राई स्किन वालो के लिए हैं।

3  अब नार्मल स्किन वाले जिनको पिम्पल कि समस्या रहती है वह क्या करेंगे ज्यादातर पिम्पल कि समस्या तो ओइली स्किन वालो को रहती है लेकिन नार्मल स्किन वाले पिम्पल में क्या करेंगे ये भी आप जान लें उसके लिए आपको बस ये करना है कि इन दोनो नुस्खे में से किसी भी एक नुस्खे का इस्तेमाल करें।

इस नुस्खे का इस्तेमाल हफ्ते में कम से कम 5 बार करें आपको इसे अपने चहरे पर लगाना नहीं है बल्कि इससे मसाज करना है
15 से 20 मिनट तक मसाज करें और फिर इसे लगा रहने दें जब तक ये सूख नहीं जाता और फिर ठंडे पानी से इसे धोलें और फिर देखे अपने चेहरे पर एक गजब का निखार और इसे करने से आपके चेहरे के सारे पिम्पल भी गायब हो जायेंगे।
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दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर ने क्यों की दो बच्चों की मां से शादी?

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आपको यह सुनकर हैरानी होगी कि दुनिया के सबसे महंगे फुटबॉलर ने दो बच्चों की मां से शादी की।यह फुटबॉलर कौन है और उसने दो बच्चों की मां से क्यों शादी की इसके पीछे का कारण बड़ा ही रोचक है।
हम बात कर रहे हैं अर्जेंटीना के 30 वर्षीय फुटबॉलर लियोन मेसी की जो एक दिन में 78 लाख 65 हजार रुपये कमाता है जिसका सालाना पैकेज 35 मिलियन पाउंड का है। जो बार्सीलोना में एक महलनुमा घर में बादशाहों की तरह रहता है। उस फुटबॉलर ने अपने गृहनगर रोसारियो में जिस 29 वर्षीय महिला एंटोनेला रोकुजो से शुक्रवार 30 जून 2017 को शादी की वह उनके बचपन की प्रेमिका हैं और दोनो बच्चे इन दोनो के ही हैं। यह दोनो बच्चे शादी के पहले ही हुए हैं क्योंकि यह दोनो लिव-इन में रहते थे। अब जाकर इन्होंने शादी की। स्पेनिश फुटबॉल क्लब बार्सिलोना के लिए खेलने वाले मेसी की शादी में कई सेलेब्रिटी पहुंचे।
कैसे हुआ प्यार
इस्पात फैक्ट्री में काम करने वाले खोर्खे मेसी के पांच साल के शर्मीले बेटे लियोन ने पांच साल की उम्र में अपने जिगरी दोस्त लुकास के घर रोकुजो को देखा। उसके बाद लुकास के माता-पिता ने गौर किया कि लियो उनके घर के कुछ ज्यादा ही चक्कर लगा रहे हैं। नौ साल की उम्र तक मेसी रोकुजो को बेहद चाहने लगे। वह अपने दोस्तों को चिठ्ठियों के जरिये बताते थे कि एक दिन रोकुजो उनकी गर्लफ्रेंड जरूर बनेंगी। मेसी के दोस्त कहते अरे वह एक सुपरमार्केट के मालिक की बेटी है और वह एक आम कर्मचारी के भोंदू बेटे को क्यों चुनेगी?

इस बीच उन्होंने अपने प्यार का इजहार कर दिया और उन्हें मौन स्वीकृति भी मिल गई। हालांकि वह 13 साल की उम्र में स्पेन चले गए और वहां बार्सिलोना क्लब में शामिल हो गए। इस दौरान भी फोन और इंटरनेट के जरिये दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ता रहा। मेसी जब भी अर्जेंटीना जाते रोकुजो से मिलते। हालांकि उन्होंने इसको छुपा कर रखा।
ऐसे खुला राज
2009 में यूएफा चैंपियंस लीग जीतने के बाद एक रिपोर्टर ने मेसी से पूछा कि क्या आपकी गर्लफ्रेंड है तो उन्होंने कहा कि हां, वह अर्जेंटीना में रहती है। हालांकि इसके बाद ही यह दोनों बार्सिलोना में साथ में रहने लगे। दो जून 2012 को इक्वाडोर के विरुद्ध गोल दागने के बाद मेसी ने फुटबॉल को अपनी जर्सी के भीतर डाल लिया क्योंकि उनकी प्रेमिका उस समय प्रेगनेंट थी। उसी साल उनके पहले बेटे थियागो का जन्म हुआ। 2015 में दूसरा बेटा मतीयो जन्मा। अब जाकर इन्होंने शादी की
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